Monday, March 24, 2014

24-03-2014's Murli


२४-०३-२०१४, सोमवार
मुरली सार: “मीठे बच्चे-डेड साइलेन्स में जाने का अभ्यास करो, बुद्धि बाप की तरफ रहे तो बाप भी तुम्हें अशरीरी बनने के लिए सकाश देंगे”प्रश्न: तुम बच्चों को जब ज्ञान का तीसरा नेत्र मिलता है तो कौन-सा साक्षात्कार हो जाता है ?
उत्तर: सतयुग आदि से लेकर कलियुग अन्त तक हम कैसे-कैसे पार्ट बजाते हैं-यह सारा साक्षात्कार हो जाता है। तुम सारे विश्व को आदि से अन्त तक जान जाते हो। जानने को ही साक्षात्कार कहा जाता है। अभी तुम समझते हो कि हम दैवीगुणों वाले देवता थे। आसुरी गुण वाले बने। अब फिर दैवी गुणों वाले देवता बन रहे हैं। अभी हम नई दुनिया, नये घर में जायेंगे।
धारणा के लिए मुख्य सार:१.अपने सब हिसाब-किताब चुक्तू कर साइलेन्स वर्ल्ड में जाने की तैयारी करनी है। याद के बल से आत्मा को सम्पूर्ण पावन बनाना है।
२.ज्ञान सागर के ज्ञान को स्वरूप में लाना है। विचार सागर मंथन कर अपना फैंसला आपेही करना है। जीवनमुक्ति में श्रेष्ठ पद प्राप्त करने के लिए दैवीगुण धारण करने हैं।
वरदान: सर्व संबंधों की अनुभूति के साथ प्राप्तियों की खुशी का अनुभव करने वाले तृप्त आत्मा भवजो सच्चे आशिक हैं वह हर परिस्थिति में, हर कर्म में सदा प्राप्ति की खुशी में रहते हैं। कई बच्चे अनुभूति करते हैं कि हाँ वह मेरा बाप है, साजन है, बच्चा है…लेकिन प्राप्ति जितनी चाहते हैं उतनी नहीं होती। तो अनुभूति के साथ सर्व संबंधों द्वारा प्राप्ति की महसूसता हो। ऐसे प्राप्ति और अनुभूति करने वाले सदा तृप्त रहते हैं। उन्हें कोई भी चीज़ की अप्राप्ति नहीं लगती। जहाँ प्राप्ति है वहाँ तृप्ति जरूर है।

स्लोगन: निमित्त बनो तो सेवा की सफलता का शेयर मिल जायेगा।

24-03-2014, Monday
Essence: Sweet children, you should have the incognito happiness that you are students in the Supreme Father’s university and that you are studying to claim your inheritance of the future new world.Question: What awareness should you constantly have so that you are able to imbibe divine virtues ?Answer: We souls are Shiv Baba’s children. The Father has come to change us from thorns into flowers. Constantly maintain this awareness and you will be able to imbibe divine virtues. Pay full attention to your study and yoga. When you have distaste for the vices you will be able to imbibe divine virtues. Whenever a vice attacks you, remember that you are a thorn and that you have to become a flower.
Essence for dharna1.Don’t hurt anyone’s heart. Check to see if there is an evil spirit inside you and remove it if there is. Become a flower and give everyone happiness.
2.You are children of the Ocean of Knowledge and so waves of knowledge should constantly emerge in you. Invent ways of doing service. You have to serve on the trains and also stay on the pilgrimage of remembrance to become pure.
Blessing: May you be completely viceless and renounce laziness and carelessness, which are traces of impurity.To fluctuate part of the daily timetable, to be lazy or careless is a trace of vice and that impacts on your becoming worthy of worship. If you do not experience yourself to be in an awakened stage at amrit vela, if you are sitting for amrit vela by compulsion or in laziness, then the devotees will also worship you by compulsion or in laziness. So, renounce laziness and carelessness and you will become completely viceless.
Slogan: You may do service, but do not have any wasteful expenditure.

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