Thursday, September 18, 2014

18-09-2014's Murli


१८-०९-२०१४, गुरुवार

मुरली सार: “मीठे बच्चे – तुम बाप के पास आये हो अपने कैरेक्टर्स सुधारने, तुम्हें अभी दैवी कैरेक्टर्स बनाने हैं”प्रश्न: तुम बच्चों को ऑखें बन्द करके बैठने की मना क्यों की जाती है ?
उत्तर: क्योंकि नज़र से निहाल करने वाला बाप तुम्हारे सम्मुख है। अगर ऑखें बन्द होंगी तो निहाल कैसे होंगे। स्कूल में ऑखें बन्द करके नहीं बैठते हैं। ऑखें बन्द होंगी तो सुस्ती आयेगी। तुम बच्चे तो स्कूल में पढ़ाई पढ़ रहे हो, यह सोर्स ऑफ इनकम है। लाखों पद्मों की कमाई हो रही है, कमाई में सुस्ती, उदासी नहीं आ सकती।
धारणा के लिए मुख्य सार:१.जो संस्कार बाप में हैं, वही संस्कार धारण करने हैं। बाप समान ज्ञान का सागर बनना है। देही-अभिमानी होकर रहने का अभ्यास करना है।
२.आत्मा रूपी बैटरी को सतोप्रधान बनाने के लिए चलते-फिरते याद की यात्रा में रहना है। दैवी कैरेक्टर्स धारण करने हैं। बहुत-बहुत मीठा बनना है।
वरदान: धारणा स्वरूप द्वारा सेवा करके खुशी का प्रत्यक्षफल प्राप्त करने वाले सच्चे सेवाधारी भवसेवा का उमंग रखना बहुत अच्छा है लेकिन यदि सरकमस्टांस अनुसार सेवा का चांस आपको नहीं मिलता है तो अपनी अवस्था गिरावट वा हलचल में न आये। अगर ज्ञान सुनाने का चांस नहीं मिलता है लेकिन आप अपनी धारणा स्वरूप का प्रभाव डालते हो तो सेवा की मार्क्स जमा हो जाती हैं। धारणा स्वरूप बच्चे ही सच्चे सेवाधारी हैं। उन्हें सर्व की दुआयें और सेवा के रिटर्न में प्रत्यक्षफल खुशी की अनुभूति होती है।

स्लोगन: सच्चे दिल से दाता, विधाता, वरदाता को राज़ी कर लो तो रूहानी मौज में रहेंगे।

18-09-2014, Thursday
Essence: Sweet children, you have come to the Father in order to reform your character. You now have to make your character divine.Question: Why are you children forbidden to sit here with your eyes closed ?
Answer: Because the Father, the One who takes you beyond with a glance, is personally in front of you. If your eyes are closed, how can you go beyond with a glance? You do not sit with your eyes closed at school. If you close your eyes, laziness will come. You children are studying in this school. This is your source of income. You are earning an income of hundreds of thousands of millions. Laziness and sorrow cannot come while earning an income.
Essence for dharna:1.Imbibe the sanskars that the Father has. Become an ocean of knowledge like the Father. Practise remaining soul conscious.
2.In order for you souls to make your batteries satopradhan, stay on the pilgrimage of remembrance as you walk and move around. Imbibe a divine character. Become very, very sweet.
Blessing: May you be a true server who serves as an embodiment of dharna and thereby attain the instant fruit of happiness.It is very good to have enthusiasm for service. However, if you do not receive a chance for service according to the circumstances, then your stage should not come down or fluctuate. If you do not have a chance to relate knowledge, but you create an impact by being an embodiment of dharna, then those marks are accumulated in service. Children who are embodiments of dharna are true servers. They receive blessings from all and, in return for their service, they experience the instant fruit of happiness.
Slogan: Make the Bestower, the Bestower of Fortune and the Bestower of Blessings pleased with your true heart and you will stay in spiritual pleasure.



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